2014 में प्रत्याशियों पर भारी पड़ा ‘नोटा’

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चंडीगढ़

चुनाव आयोग ने प्रत्याशियों के प्रति नापसंदगी जाहिर करने के लिए इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ई.वी.एम.) में नन ऑफ द अबव (नोटा) का विकल्प दिया तो अब मतदाता नोटा बटन दबा कर ही पोङ्क्षलग बूथ से लौटने लगे हैं। गत लोकसभा चुनाव में हरियाणा में वोटरों को ई.वी.एम. पर पहली बार नोटा का विकल्प दिया गया था। लिहाजा, तब वोटिंग के दौरान नोटा भी खूब चला। उम्मीदवारों के प्रति नापसंदगी का आलम यह रहा कि दलीय प्रत्याशियों को छोडि़ए, किसी निर्दलीय प्रत्याशी को भी सांसद चुनने लायक नहीं समझा। नोटा इस कदर हावी रहा कि कई उम्मीदवारों को उससे भी कम वोट मिले। राज्य के 34,220 लोगों ने एक भी प्रत्याशी को पसंद नहीं किया था। नोटा का प्रयोग सबसे ज्यादा अम्बाला के वोटरों ने किया था। वहां 7816 वोटरों ने किसी भी उम्मीदवार को काबिल नहीं माना था। इनमें अम्बाला संसदीय क्षेत्र के जिला पंचकूला, अम्बाला कैंट, अम्बाला सिटी, सडौरा और जगाधरी के वोटर शामिल रहे। दूसरे स्थान पर रोहतक रहा, जहां 4932 वोटरों ने किसी भी उम्मीदवार के हक में मतदान के बजाय नोटा को वोट दिया। रोहतक सीट के कोसली, बहादुरगढ़, कलानौर, बादली और रोहतक से नोटा को सर्वाधिक मत मिले थे। इस मामले में सिरसा तीसरे स्थान पर रहा था।

पिछले लोकसभा चुनाव में अम्बाला संसदीय क्षेत्र में नोटा से भी कम वोट प्रत्याशी गुरनाम सिंह को मिले। वोटरों ने जहां नोटा को 7816 वोट दिए, वहीं गुरनाम सिंह को महज 933 वोट मिल सके। यही स्थिति यहां से चुनाव लडऩे वाले ईश्वर सिंह, राजेंद्र कुमार बतौला, राम जवारी, फूलचंद रतवा, भूपेंद्र कुमार, भूरा राम और रमेश चंद की थी। इन प्रत्याशियों को भी नोटा से बहुत कम मत मिले। कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र से चुनाव लडऩे वाले किरण पाल को विभिन्न विधानसभा हलकों से 100 से भी कम मत मिल सके। उनकी तरह सतीश सिंघल, कांता अलारिया की स्थिति भी काफी कमजोर रही। सिरसा संसदीय क्षेत्र में जयपाल भट्टी, फकीरचंद, संजीव बोजराज, मनजीत सिंह को सबसे कम मत मिले। हिसार संसदीय क्षेत्र में 461 वोट नोटा को मिले थे। युद्बवीर, सीता राम, सुंदर, राकेश कुमार, बलजीत, बलवान सिंह को 20 से भी कम मतों से संतोष करना पड़ा था। 20 का आंकड़ा सीता राम ने 2 अतिरिक्त मत लेकर पार किया था।

सोनीपत संसदीय क्षेत्र में नोटा को सोनीपत, जींद, खरखौड़ा, घनौर, बरोदा, सफीदों से वोट मिले, जबकि यहां से उम्मीदवार अनूप सिंह दहिया, रोहतक में प्रत्याशी रविंद्र कुमार, करण सिंह, जय सिंह को नोटा से भी कम मत मिले थे। भिवानी-महेंद्रगढ़ संसदीय क्षेत्र के भिवानी विधानसभा हलके, महेंद्रगढ़, तोशाम, लोहारू, अतेली के लोगों ने नोटा को ज्यादा मत दिए। गुरुग्राम संसदीय क्षेत्र के गुरुग्राम विधानसभा हलके, बादशाहपुर, रेवाड़ी के लोगों ने नोटा को सर्वाधिक वोट दिए। इस क्षेत्र के प्रत्याशियों सुरेंद्र खुल्लर, राजेश, उमेद सिंह को 50 से भी कम मतों से संतोष करना पड़ा। फरीदाबाद संसदीय क्षेत्र के विधानसभा हलकों बदकल, बल्लभगढ़, टिगाओ के वोटरों ने नोटा को प्रत्याशी दीपक गौड़, चौधरी दयाचंद, विजय राज, ललित मित्तल से ज्यादा वोट दिए। करनाल संसदीय क्षेत्र में करनाल विधानसभा क्षेत्र, पानीपत (शहर), पानीपत (ग्रामीण) घरौंडा, नीलोखेड़ी के वोटरों ने सबसे ज्यादा नोटा को वोट दिए। उम्मीदवार के.एस. मोर, दुलीचंद, देवेंद्र जगलान, रामफल शर्मा को 100 से भी कम मत मिले।

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