रैलियों में जनता के सभी मुद्दे गायब,जुमलेबाजी को दी सभी पार्टियों ने पहल

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फरीदकोट

पंजाब ही नहीं, बल्कि देश में इस बार लोकसभा चुनाव में चुनावी भाषणों में ‘नई हवा’ बह रही है तथा प्रधानमंत्री के पद वाले उम्मीदवार से लेकर आम हलके के उम्मीदवार तक कोई भी लोगों को सुविधाएं देने वाले मुद्दों बारे बात नहीं कर रहा है। लोकसभा चुनाव के लिए अब तक 3 पड़ाव में वोट पड़ चुके हैं । जैसे-जैसे वोटों की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे चुनाव प्रचार तेज होता जा रहा है। भाजपा कांग्रेस पर आरोप लगा रही है, तो कांग्रेस भाजपा के साथ-साथ अकाली दल, ‘आप’ व दूसरे गठबंधन वालों को उलाहने दे रही है। देश भर में जुमलों का माहौल गर्म है और इस बार यह जुमले सिर्फ भाजपाई ही नहीं, बल्कि बाकी सभी पार्टियों वाले भी छोड़ रहे हैं।

भाषणों की बात करें तो एक अपने विरोधी को चोर कह रहा है तो दूसरा उसे भ्रष्टाचारी व कई कुछ। पंजाब में ज्यादा शोर बाहरी व पैराशूट के माध्यम से आए उम्मीदवारों बारे जुमलेबाजी करके मचाया जा रहा है। देखा जाए तो इस बार सभी पार्टियों के नेता सिर्फ भाषणों के साथ ही समय बिताने में लगे हुए हैं। वोटरों को चुनाव में बहुत-सी उम्मीदें होती हैं, परन्तु इस बार सभी आशाएं धूमिल होती नजर आ रही हैं। हालांकि यह देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए चुनाव हो रहे हैं, परन्तु इसमें लोगों के लिए ‘सुविधाओं के पिटारे’ में से कोई वायदा नहीं किया जा रहा।

राजनीतिज्ञों की मानें तो इस बार सभी पार्टियां इस मुद्दे को इसलिए भूना रही हैं कि लोग बड़े स्तर पर जागरूक हो रहे हैं।  सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टियों से किए वायदों बारे जवाब मांगने लगे हैं। यहां तक कि पंजाब में तो बड़ी पार्टियों के बड़े उम्मीदवारों से चुनाव प्रचार दौरान गांवों व शहरों में माइक तक छीनकर सवाल करने लगे हैं। इन हालातों को देखते हुए उम्मीदवारों ने जुमलेबाजी, राजनीतिक चुटकुले, तोहमतें आदि लगाने को पहल दे रखी है।

देश व पंजाब में बेरोजगारी, व्यापारियों की बर्बादी, गरीबी रेखा से नीचे रह रहे लोगों के लिए सुविधाएं, नशे, सड़कों पर बढ़ रहे हादसों, पिछड़े वर्गों की आॢथक मंदहाली, किसानों की खुदकुशियां, खेत मजदूरों की समस्याएं, किसानों के कर्जे, बेरोजगारी भत्ते, छोटे कारोबारियों के लिए ऐलान, पानी व हवा में बढ़ रहा प्रदूषण, अस्थायी मुलाजिमों को स्थायी करना जैसे बड़े मुद्दे इस बार चुनाव में से गायब हैं। समाजसेवी अन्ना हजारे के समर्थक रहे फरीदकोट के समाज सेवी प्रवीण काला ने कहा कि इस बार मतदान में मुद्दे गायब करके लोगों को सभी पार्टियां सिर्फ जुमले सुना रही हैं और इन जुमलों से लोगों का पेट नहीं भरने वाला है। उन्होंने लोगों से कहा कि वायदे करने व सुविधाओं का भरोसा देने की बजाय सिर्फ राजनीतिक चुटकुले सुनाने वाले राजनीतिज्ञों से रैलियों में जवाब लिए जाएं।

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